तीर्थंकर · 7 / 24
सुपार्श्वनाथ
सुपार्श्वनाथ
वाराणसी में जन्मे — जहाँ सोलह स्थान आगे पार्श्व भी जन्मेंगे।
वाराणसी के दो तीर्थंकर लगभग पूरे अवरोहण को अपने बीच बाँधते हैं: सुपार्श्व 200 धनुष के, गहरे सागरोपम-युगों में; पार्श्व नौ हाथ के, लिखित इतिहास की पहुँच में।
उनका लांछन स्वस्तिक है — इस परम्परा में मंगल का प्राचीन चिह्न, अष्टमंगल में से एक। आयु 20 लाख पूर्व, पद्मप्रभ के नौ हज़ार कोटि सागरोपम बाद।
माप और संख्याएँ
| क्रम | 7 / 24 |
|---|---|
| ऊँचाई | 200 धनुष |
| आयु | 20 लाख पूर्व |
| पद्मप्रभ के बाद | 9,000 कोटि सागरोपम |
| जन्म | वाराणसी |
| वर्ण | स्वर्ण |
| लांछन | स्वस्तिक |
| मोक्ष | सम्मेत शिखर |
| माता-पिता | प्रतिष्ठ · पृथ्वी |