जै · The Jain Encyclopedia
खंड · 159 स्थान

लोक

लोक

किसी ने नहीं बनाया, फिर भी अंतिम योजन तक मापा गया — और ग्रंथ जैसा कहते हैं, ठीक वैसा स्थान-दर-स्थान अंकित।

जैन लोक का हर नामित स्थान — सात नरक-पृथ्वियों से लेकर लोक के शिखर पर स्थित उस स्फटिक शिला तक जहाँ मुक्त जीव विराजते हैं। हर प्रविष्टि में उसका देवनागरी नाम, ग्रंथों में दिए गए माप, और जिन-जिन से वह जुड़ा है उनके सूत्र हैं। सर्वत्र श्वेताम्बर गणना का अनुसरण।

यह सब सजीव मानचित्र में भी देखा जा सकता है।

लोक, मंज़िल दर मंज़िल 39

मनुष्य लोक 13

जम्बूद्वीप 36

महाविदेह 42

भरत क्षेत्र 9

मेरु पर्वत 7

मध्यलोक के वलय 13

समयं गोयम! मा पमायए

हे गौतम! एक समय मात्र का भी प्रमाद मत करो।

उत्तराध्ययन सूत्र 10