जै · The Jain Encyclopedia
खंड · 125 स्थान

लोक

लोक

किसी ने नहीं बनाया, फिर भी अंतिम योजन तक मापा गया - और ग्रंथ जैसा कहते हैं, ठीक वैसा स्थान-दर-स्थान अंकित।

जैन लोक का हर नामित स्थान - सात नरक-पृथ्वियों से लेकर लोक के शिखर पर स्थित उस स्फटिक शिला तक जहाँ मुक्त जीव विराजते हैं। हर प्रविष्टि में उसका देवनागरी नाम, ग्रंथों में दिए गए माप, और जिन-जिन से वह जुड़ा है उनके सूत्र हैं। सर्वत्र श्वेताम्बर गणना का अनुसरण।

यह सब सजीव मानचित्र में भी देखा जा सकता है।

सजीव मानचित्र में देखें →

लोक, मंज़िल दर मंज़िल 6

मनुष्य लोक 12

जम्बूद्वीप 36

महाविदेह 42

भरत क्षेत्र 9

मेरु पर्वत 7

मध्यलोक के वलय 13

समयं गोयम! मा पमायए

हे गौतम! एक समय मात्र का भी प्रमाद मत करो।

उत्तराध्ययन सूत्र 10