समय
काल की सबसे छोटी इकाई। छोटी परिपाटी से नहीं: छोटी इसलिए कि इससे छोटा कुछ घट ही नहीं सकता।
इसकी परिभाषा घड़ी से नहीं, गति से है। एक परमाणु — एक अविभाज्य अणु — आकाश के एक प्रदेश से ठीक अगले प्रदेश तक अपनी मंदतम गति से जाता है। उतने में जो काल लगा वह एक समय है। इससे शीघ्र कुछ हो नहीं सकता, इसलिए इससे छोटा कुछ मापने को है ही नहीं।
यह परिभाषा वास्तविक कार्य कर रही है। यह काल को उन दो चीज़ों से बाँधती है जो परिवर्तन को सम्भव बनाती हैं — एक अविभाज्य वस्तु और एक अविभाज्य स्थान — और काल को काल से परिभाषित करने से इनकार करती है। जैन शब्दावली में वर्तना, अर्थात् परिवर्तन में सहायता, ही काल है।
परम्परा इस दावे को एक दृष्टांत से परखती है। कोई बलवान् जुलाहा महीन वस्त्र फाड़े तो वह क्षणमात्र लगता है। पर वस्त्र तंतुओं का है, और हर तंतु पिछले के बाद टूटता है; और हर तंतु रेशों का है, और हर रेशा पिछले के बाद टूटता है। एक रेशा टूटने में भी असंख्य समय लगते हैं। जो कुछ हमें तत्क्षण लगता है, वह है नहीं।
एक आवलिका में — सबसे छोटी मापनीय इकाई में — कितने समय होते हैं? उत्तर कोई संख्या नहीं है। उत्तर है असंख्यात, और जैन गणित में यह कंधे उचकाना नहीं, एक ठीक-ठीक निर्धारित श्रेणी है। देखें संख्या की सीढ़ी: आवलिका के समय ठीक जघन्य युक्तासंख्यात हैं।
वर्तमान एक समय चौड़ा है। बीते समय अनंत हैं और आगामी समय अनंत, और उनके बीच एक अविभाज्य क्षण खड़ा है — काल का वही एक भाग जिसमें कुछ भी वास्तव में रहता है।
माप और संख्याएँ
| परिमाण | अविभाज्य |
|---|---|
| परिभाषा | परमाणु का एक प्रदेश पार करना |
| इससे मंद गति | असम्भव |
| एक आवलिका में | असंख्यात |
| वर्तमान | एक समय |
| भूत और भविष्य | अनंत समय |
| मोक्ष-गमन में | एक समय |
| व्यवहार्य लघुतम अवधि | अन्तर्मुहूर्त |