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खंड · 49 तीर्थंकर

तीर्थंकर

तीर्थंकर

हमारे अर्ध-चक्र के चौबीस, और उनके आगे-पीछे की चौबीसियाँ।

चक्र के हर अर्ध-भ्रमण में चौबीस तीर्थंकर होते हैं। हमारे चौबीस ऋषभ से चले — पाँच सौ धनुष ऊँचे, जिनके बीच के अन्तर सागरोपम में गिने जाते हैं — और महावीर तक पहुँचे, जो सात हाथ के थे और पार्श्व के केवल ढाई सौ वर्ष बाद आये। ग्रंथ पिछले अर्ध-चक्र के चौबीस और आने वाले चौबीस के नाम देते हैं, पर माप केवल हमारे चौबीस के। सर्वत्र श्वेताम्बर गणना का अनुसरण।

यह सब सजीव मानचित्र में भी देखा जा सकता है।

अभी उपदेश देते बीस 19

आगे-पीछे की चौबीसियाँ 2

तीर्थंकर कैसे अंकित होते हैं 3

हमारे चौबीस 24

बीस विहरमान, एक साथ खड़े 1

समयं गोयम! मा पमायए

हे गौतम! एक समय मात्र का भी प्रमाद मत करो।

उत्तराध्ययन सूत्र 10