अवधारणा · चौबीस का समूह
चौबीसी
चौबीसी
चक्र के हर अर्ध-भ्रमण में चौबीस तीर्थंकर होते हैं — इस समूह का नाम चौबीसी है।
कालचक्र छह आरों से उतरता है और छह से चढ़ता है, अनन्त काल तक। हर अर्ध-भ्रमण में भरत में चौबीस तीर्थंकर होते हैं — न अधिक, न कम। हमारे ऋषभ से महावीर तक चले।
अतः परम्परा हर क्षण तीन चौबीसियों की बात करती है: अतीत, अभी बीती; वर्तमान, हमारी; और अनागत, आने वाली। शास्त्र बहत्तर के नाम देते हैं, पर ऊँचाई, आयु और अन्तराल केवल हमारे चौबीस के — इसीलिए केवल हमारी चौबीसी अवरोहण में अंकित हो सकती है।
महाविदेह में, जहाँ चक्र नहीं घूमता, तीर्थंकर सदा उपस्थित रहते हैं — बीस विहरमान, हर चौबीसी से बाहर।
माप और संख्याएँ
| प्रति अर्ध-चक्र | 24 |
|---|---|
| शास्त्रों में नामांकित | 3 समूह · 72 |
| मापे हुए | केवल हमारे |