मिथ्यात्व। अवधि कम से कम अन्तर्मुहूर्त, अधिक से अधिक अर्ध पुद्गलपरावर्त से कम।
सत्य क्या है, कौन उसे सिखाता है और कौन अनुसरण के योग्य है — इस बारे में पूर्ण या आंशिक भ्रम। कर्मग्रन्थ की गिनती के सभी 148 कर्म यहाँ सत्ता में हैं। जो जीव कभी चढ़ा ही नहीं वह यहाँ है, और जो पूरा गिर गया वह यहीं लौटता है।
जिसे कभी सम्यक्त्व मिला और खो गया, उसके लिए यह अर्ध पुद्गलपरावर्त से कम तक रह सकता है — यानी लगभग असीम — और कम से कम एक अन्तर्मुहूर्त।
चौदह गुणस्थान, सीढ़ी दर सीढ़ी — 1 · मिथ्यादृष्टि रेखांकित