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बावन, पृथ्वी पर बने

बावन जिनालय

बावन जिनालय

वह मन्दिर जिसके मुख्य गर्भगृह के चारों ओर बावन देवकुलिकाएँ हों। यह संख्या स्थापत्य की रूढ़ि नहीं है — यह नन्दीश्वर की प्रतिकृति है।

बावन बावन है। इस रचना में मध्य में मूल प्रासाद होता है और उसके चारों ओर बावन देवकुलिकाएँ, नन्दीश्वर के हर शाश्वत जिनालय के लिए एक। आबू का विमल वसही इसी विधान से बना है, और गुजरात तथा राजस्थान भर में और भी बहुत से।

द्वीप स्वयं भी सीधे उत्कीर्ण होता है — एक शिला या धातु-पट्ट जिस पर बावनों जिनालय एक साथ दिखाए जाते हैं, हर भुजा पर तेरह, जिसे मन्दिर में स्थापित कर पूजा जाता है। अष्टाह्निका में व्यक्ति वास्तव में इन्हीं के सामने खड़ा होता है।

यह पूरी व्यवस्था वहाँ जाने की एक रीति है जहाँ कोई जा नहीं सकता। जिस पाठक ने किसी बावन जिनालय की परिक्रमा की है उसने आठवें द्वीप की प्रतिकृति की परिक्रमा की है, चाहे उस समय किसी ने यह बताया हो या नहीं।

माप और संख्याएँ

देवकुलिकाएँ52, एक के चारों ओर
बावनबावन
किसकी प्रतिकृतिनन्दीश्वर
उदाहरणविमल वसही, आबू
और बनते हैंउत्कीर्ण शिला और धातु-पट्ट

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